हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार निम्नलिखित रिवायत “मुन्तख़ब मीज़ानुल हिकमत” किताब से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार हैः
امام حسن عسکری علیهالسلام:
لَا تُمارِ فَیَذْهَبَ بَهَاؤُکَ، وَلَا تُمازِحْ فَیُجْتَرَأَ عَلَیْکَ.
इमाम हसन अस्करी (अ) ने फ़रमाया:
“बहस मत करो, वरना तुम्हारा सम्मान समाप्त हो जाएगा और मज़ाक मत करो, वरना लोग तुम्हारे साथ गुस्ताख़ी करने लगेंगे।”
मुन्तख़ब मीज़ानुल हिकमत, पेज 512
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